बरसाना बरसाना ये है बरसाना,
बाहर पीकर गिरनें वालो यहां सम्भंल कर आना,
चार खुट में फिरो भल्याई, दिल का भेद नहीं देणा रे
बजे बधाइयां जन्मे कन्हैया, हर तरफ है चर्चा नंदलाल का,
देखे री मैंने दो झूले मतवाले,
पर्वत पर कुटिया बनाई रे भोले बाबा तुमने,
रोए रोए द्रोपत कान्हा को पुकारती जी,
हारे का सहारा श्याम, इकलौता सहारा श्याम
रघुवर का सेवक पुराना लगता है,
गोरा झूलन पधारो घिर आए बदरा।
सांवरिया तेरा दर मुझको भा गया,
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