चल ले चल अपनी नागरिया, वृंदावन वाले सांवरिया।
तीनों लोको में भोले के जैसा, दूसरा कोई दानी नहीं है,
जब से तुम संग लौ लगाई, मैं बड़ी मस्ती में हूँ,
सांवरे से मिल गए नैना, सखी री मेरो छीन के ले गए चैना,
बचपन से माँ ने मुझे, श्री श्याम सिखाया है
ग्यारस की है रात, बाबा सुनलो जल्दी आना है,
हर ग्यारस की रात को, बाबा को बुलाएंगे
मैं हारा मैं हारा, मुझे दे दो नाथ सहारा,
मैं तो हार गया दुनिया से, यही बोल बोलके,
हारे का सहारा साँवरिया, डूबे का किनारा साँवरिया,
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