नाचे ठुमक ठुमक हनुमान,
मेहंदीपुर की गलियों में,
मेरे दिल की पतंग कट गयी,
मुरली वाला लूट ले गया,
मेरी विनय मान लीजे,
श्यामा विनय मान लीजे,
ब्रिज विच आये ने गोपाल गोपियों,
क्यों छिप के बैठते हो, परदे की क्या जरूरत,
अरे गूजरीन को प्यारो श्याम हमारे घर काहे को आवेगो,
दिल तेरे ते फ़िदा मेरे श्याम हो गया,
भजो रे मन राम गोविंद हरि
मेरे दिल में बाबा,
बस तेरा बसेरा हो,
रोज मेरी खिड़की से झांकता है वो
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