कमला में आई बहार, बहार मोरी सजनी, कमला में आई बहार।
सुंदरी सलोनी प्यारी,मिथिला दुलारी हे किशोरी मोरी
खो जाएगी मेले में तने फिरू ढूंढता नार में,
मीठी लागे रे सांवरिया थारी राबड़ी रे।
उठो म्हारा माताजी उठो म्हारा पिताजी, नहाए धोए माला फेरो भगवान।
मैं तो पग पग फुल बिछाऊं ,बालाजी ने आंगने बुलाऊं।
चरण में रखना शरण में रखना सदा ही अपनी लगन में रखना।
मेरा सोना खाटू वाला मिलन आपा जावनगे
बरसो बरसो इंदर रूत आयगी।
चलो वृंदावन धाम,
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