हाथ पे भोलेनाथ लिखा ले माथ पे महाकाल
पड़ गये झूले प्रियतम नहीं आये,
मुझको राधा रमन, करदो ऐसा मगन,
हर रोज श्याम तेरा , श्रृंगार किया है,
चली जा रही है ये अनमोल स्वासें,
बालू रेत से बनाए भोलेनाथ चढ़ाऊं लोटा जल भर के
श्याम तुम सौ नजरिया लगाई लूगी
रुकमण करले रसोई तैयार सुदामा के रोज रोज आवे से।
मत उलझन में पड़ इनसान
मंदिर सुना बिन जोती,
माला र सुनी बिन मोती
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