हरि नाम रे नाम रो कोई खातो खोलो रे।
डोरी खींच लो सांवरिया थारे चरणा में।
जियो जियो चंदा चांदनीया , चंदा चांदनीया रे
सांवलिया सरकार तुम्हारी लीला न्यारी है
थे कद आओ महादेवा ,मैं करूं आपरी सेवा
स्वर्ग है घर के माही, बाहर तू भटके काई
चलो रे चलो सब उज्जैन नगर।
जिसका मेरे श्याम से लगाव हो गया
आरती उतारू तेरी परम उद्घारा।
राधा की चाहत कृष्णा,गोकुल में आहट कृष्णा,
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