श्री कृष्ण का पाऊं दर्शन आयो सदा शिव गोकुल में ।
चरखा परे हटा लें री, मेरी सूरत राम में लागी।
तनै तो मेरा पिया मोह लिया है,
सुन चटक चुन्दड़ी आली।
चार दिनों का रैन बसेरा, आखिर तोकु मरना है।।
मन्दिर मस्जिद गिरजाघर में, बाँट दिया भगवान
गोरा घुंघट के पट खोल डालूंगा तोसे भंवरिया।
सोने री द्वारिका ने सोने रा दरवाजा
नीली नीमडी रे जिन रा झिरमिरिया सा पान।
थे तो कहो बाबाजी सांची, थारो सांवरियो कद आसी।
तेरे द्वार खड़ा भगवान,भगत भर दे रे झोली।
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