सारे जग से हारी हूं एक दुखियारी हूं।
आ जाओ श्याम हम तुमको रंग लगाएं
हमरो शिवजी के लम्बी लम्बी जटवा
फागण का मेला है और चढ़ी खुमारी है,
मंदिर अब बनने लगा है भगवा रंग चढ़ने लगा है
बैल पर चढ़कर, मेरे भोलेनाथ आए है,
तेरी दुनिया में जो भी चला आता पर यहां से नहीं जाना चाहता
तेरे नैना है तिरछी कटार छलिए,
जब हो गया सच्चा प्यार क्यों ना कृष्ण मिले
चिकनी मिट्टी से बनाये भोलेनाथ चढ़ाऊँ लोटा जल भर के
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