सरौता कहां भूल आए प्यारे नंदोईया।
हरि ओम शिव ओम शिव रट रे
श्याम पर रख विश्वास वो पार लगाएगा।
कृष्ण कृपा हो तभी, कृष्ण का नाम ले सकोगे
ऊंचे पर्वत बैठा म्हारा शिवजी, धुना धुकावे म्हारी पार्वता।
नंदी पे है चले है शंकर,चले हैं गौरा ब्याहने को
ओ मेरे वतना वे, तेरे लिए जीता हूं
कावड़ में जल भर ला रे कांवरिया कांवड़ में जल भर ला रे ला
शिव शंकर कैलाशपति का डम डम डमरू बाजे से
देवों में महादेव कहाते अजर अमर अविनाशी
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