आजा श्याम धणीं,
रो रोकर फरीयाद करां हाँ,
विपदा बहुत घणी,
खुशबू आ रही है,
मेरे महादेव की वजह स।
मैं हूं तेरा दीवाना महाकाल का दीवाना।
दया थोड़ी सी कर दो ना
मेरे दामन को भर दो ना
मोरे उज्जैन के महाकाल,
अजब तेरी कारीगरी रे करतार
एकला मत छोड़ जो , बणजारा रे ।
तज दिना प्राण,
काया कैसे रोई,
मोहना वे असां तेरा जन्मदिन मानवना
मेलो फागुन को खाटू में चलो श्याम ने रंगस्यां जी,
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