नेकू आगे आ क्यों भागे कनूआ कारे
होली खाटू धाम की सारा इंडिया ठुमकदा।
होली है यहां मैया तुम हो कहां,
होली में कान्हा मचल गयो री , मेरी चुनरी को रंग के निकल गयो री ।
मेरी रंग गयो रात चुनरिया रे वो मोहन कृष्ण मुरारी।
झूम झूम नाचे गाए बोलके जैकारे।
बालाजी का मुकुट ऊपर रंग बरसे,
किस बात की फिक्र है,
जब सांवरा खड़ा है,
ईश्वर दास जी के सोहे पीली पागड़ी ये मां,
बड़तल वाला खेलता जी खेलत चढ़गी ताप बुलाल्यू सेडल माताजी।
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