पंचम रूप में स्कंदमाता लेकर आती खुशहाली
मैया का दर प्यारा लगे
मेरो मन लाग्यों वृंदावन में
जब भी मुश्किल से हो सामना, उस समय तुम मुझे थामना।
मात मेरी आजा री तेरे भगत बुलावे।
तेरा बजवा दूंगी ढोल मेरे घर आ जाइए अंबे मां।
भवन में दरस दिखाओ आओ जी आओ अंबे मां।
वो तो ऑर्डर खूब चलावे री बनो थानेदार लांगुरिया।
आओ जगदंबे में करती पुकार, मैया मेरी नैया लगा दो पार।
जागी जागी जागी रे,
दिवले री जोत जागी रे ।
You must be logged in to post a comment.