मनड़ा रे जे तू बालाजी ने ध्याय सी,
मुझे दर्शन दे गई माँ कल रात सोते सोते,
जब-जब भी पुकारू माँ तुम दौड़ी चली आना,
रात रुको मैया सवेरे चली जाना,
जटा में बैठी गंगा बोली थोड़ा सा रुक जाओ,
रेशमी चोला पहाड़ों वाली का,
तेरा आव्हान किया है माँ चली आओ चली आओ।
संभालो माँ मेरी नैया खिवैया तेरे जैसा हो।
घंटी बजे दिन रात मां तेरे मंदिर में।
हे मेरे प्यारे का नाम श्री कृष्ण।
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