मोड़ो क्यूँ आयो बनवारी।ले जा गांठ तिहारी रे
गजराज भयो जद आधी रैन तिसायो
चांदनीये में चमके चिर,चिर उढ़ासी म्हारो धरम को वीर
भानु के आंगन में आज बजे बधाई है।
वन में मच रही हाहाकार घोड़ा पकड़ लियो लव कुश ने।
आयो बाबा को जन्मदिन नाचो गाओ
तेरी झांकी पे जाऊं बलिहार मैया। मैं तो नाचूंगी तेरे दरबार मैया
प्रभु का नाम लेने से तेरी क्या जीभ दुखती
बोलै नारी सुणो पियाजी, मानो म्हारी बात द्वारका थे जाओ।
पहले परे रहे आम तरे, हां हां आम तरे।दूल्हा बन गए हरे हरे
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