कईयां बैठा हो चुपचाप भवानी मुंडे बोलो ये
साँवरिया घर आजा रे,
नदी रे किनारे म्हारो गाँव
मंदिर थारो प्यारो घनों लागे ओ
एक बार आओ जी,
बालाजी म्हारे आंगणा,
तुम आना पवन कुमार शंकर अवतारी।
आना पवन कुमार, हमारे हरी कीर्तन में।
तू भी तो कोनी आवै दुनिया बावलियों बतलावे,
भोले जी सारी रात बरस रहयो पानी,तूने बात न मेरी मानी।
राधा नाम कीर्तन कराते चलो।
भोले बाबा तेरी जटा में गंगा प्यारी लागे
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