तुझपे सब छोड़ा है, जग से मुँह मोड़ा है
जब कोई काम न आएगा, साँवरा साथ निभाएगा
इस गम का नही र ठिकाना
इस गम का नही ठिकाना,,
भरण गइ जल जमना रो पाणी
म तन पूछू तुलसा रानी कुण तेरी मंदिर चिणायो ए
सुन लो अरज मेरी ओ सालासर वाले
बंसी का बजाना खेल भी है
दो आंसु बचाए रखना,
मच्छरदानी में हमको बुलावे सजना।
बहन तू तो पांच ठगों ने ठगली कब भजन करेगी पगली।
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