अब काशी में लगे आवाज मोल कोई ले लो रे भैया
हो मेरा गुरु पाया ज्ञान रा प्याला,
आहे तने फेर मिलेंगे भगवान,
दान करिए दो रोटी का,
कृष्ण गोविन्द गोविन्द गोपाल नन्दलाल,
नाम रट ले भोले का नाम रट ले,
बड़ी गजब की है करामात नाम है मोर छड़ी।
राम तेरी दुनिया में इंसान कर्म क्यों ऐसा करता है।
पीलो रे हरी नाम का प्याला रोग सभी मिट जाएंगे।
मानकों भूल गमायो रे,सवा लाख रो हीरो बंदा रेत रुलायो रे।
सुनाओ सब सखियां स्वागत में गारी सुनाओ।
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