तुम्हें खाटू में आकर दीवाना ढूंढ रहा।
जन्म के साथी मात-पिता है कर्म के साथी कोई नहीं
राम जी रो राख भरोसो,मेरा भाई।
सीता पढ़न चली स्कूल कर्म की रेखा न्यारी है।
म्हासू आंख मिचौली खेले
गोरा तेरा घर आंगन फूलों सा महकता है
मेरी मटकी पर नजर मत डारे रसिया,
कुंकू केशर रा पगल्या मंडाऊ में तो मनडे रा फूल चढ़ाऊं मां,
मेरा श्याम धनी खाटू श्याम धनी।
कर्मों से नालायक हूं फिर भी मुझको अपनाता है।
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