हाथी पे बैठे गणेश गणेश लक्ष्मी मैया ।
कीर्तन करते करते,
मैं तुझमे खो जाऊं
रोकर रघुवर जी कहते हैं हनुमान से, भोर होते ही लक्ष्मण जी मर जाएंगे।
बहुत बिगड़ गई मैया गुजरिया बहुत बिगड़ गई रे।
मूषक पर असवार जय जय।
मस्तों की मस्ती बरसाना मेरा गांव है।
क्यों भूल गया रे इंसान रास्ता भक्ति का।
किस चीज की नंदी प्रतीक्षा कर रहे थे
मैं श्याम पिया की होय गई।
आजा गोकुल में नंदलाल मात तेरी रोती डोले रे।
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