पिया सावन का मेला मने हरिद्वार घुमाइए तूं।
मोहे आवे नींद का झोंका,मोहे आवे नींद का झोंका, गोदी में उठा ले ओ भोले।
डूंगर ऊपर डूंगरी में शिव पार्वती बैठा हो।
काल भी उसका क्या करे जो भक्त हो बाबा तेरा,
महाकाल की बस्ती में बसने को जी चाहे।
म्हारे लाड कंवर को ब्याह रचयो है मंगल गावा जी हरख मनावा जी
भरतरी की माता रोवे रे, अरे लाला कौन पिवेगा काचो दूध भरतरी जोगी हो गो रे
आखिर मरनो रे, साँवरिया वालो सुमिरन करनो रे
पीके भरा भांग का प्याला भोला नाचे हो मतवाला,
कोई प्रेम की पेंग झुलाओ रे
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