धूम मची काशी नगरिया में, नगरिया में। भीड़ बड़ी भोले की दुआरिया में।
छोटी सी कन्या पार्वती शिव शंकर की पूजा करती थी,
आया है सावन महीना चलो काशी नगरिया,
पी गए पी गए भोलेनाथ पी गए सारी भंगिया।
मेरा भी मन रंग दो ओ भोले बाबा,
राधा धीरे झूलो चुनरी उतर जावेली।
मेरे बांके बिहारी बांके सनम,
कब तक न झूला झुलाओगे मोहन
सगा रा कागद आया छे जी सांवल सा।
भोला पीकर चाल्या भांग, पर्वत डगमग डगमग हालया।
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