नाच नाच रे मोरुडा थोड़ी पांखड़या पसार।
सांवरिया म्हारे आवजो थे छाने छाने छाने
सावन में कैलाश जाना होगा गोरा को झूला झूलाना होगा।
मैं तो सावन में फूल बिछाऊंगी जब गौरा मेरे घर आएगी।
राधा झूला झूल रही श्याम सुंदर के संग।
मन होयो बेरागी रे आज मन नमः शिवाय गाये
मेरा चांद पर प्लाट काट दो
म्हारे बरत बड़ो एकादशी को
जब संग है लखदातार फिर क्या घबराना।
तड़के छे म्हारे एकादशी। कोई मोटा मोटा रोटला कर जो जी
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