ऊंचा नीचा कुलदेवी रो धाम भवानी।
गोरा नू बयाहोंन चलिए छेती आजा भगत पियारे।
डमरु बजे दिन-रात भोले तेरे मंदिर में।
अभिलाषा है मैं एक दानी बनूं।
ओ बम बम भोले डमरू तेरा बोले ये भेद सारे खोले ,तू सबसे महान है
माला तुलछा की ले आई रे, मंदिर में मिल गयो सांवरियो
भोले का जयकारा तू लगा के देख लै
बन जाये सारे काम तू भी आके देखलै।
क्या कहना वाह क्या कहना,बालाजी सरकार का,
मेरा हाथ थामें भोले,यूं ही साथ साथ चलना
महाकाल ने चलना सिखाया है।
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