बोलते चलो बोलते चलो, शिव गोरा के जयकारे बोलते चलो।
भोलेनाथ सदा शिव अविनाशी।
शबरी के खुल गए भाग कुटिया में राम आ गए।
बोल बोल काग़ा मेरे, राम कब आएँगे,
सावन की बरसै रिमझिम फुंहार,
गुरू सा बिना कुण म्हाने प्रेम जळ पावे,
पता नहीं किस रूप में आकार, शिव शंकर मिल जाएगा
किशोरी इतना तो कीजो, लाड़ली इतना तो कीजो,
पोरा पाप रा आया,
छुटा नेम धर्म सब डूबा,
जोगन आज तुम्हारी मैं घनश्याम हो गई।
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