मैं ऐयां कोनी जानियों बुढ़ापो बेरी आजासी।
श्री श्याम शरण में आ प्यारे यहां श्याम नाम अमृत बरसे।
श्याम खाटू वाले कृपा कर दे।
हाजिरी भरवाने आई हूं कन्हैया लिख लीजो खाते में
सारे जग ने मचा दिया शोर कान्हा मेरा है
झूला झूले बांके बिहारी।
बहन में दे दूं झुकता तोल बुढ़ापा जो कोई लेता होये
मेरे मोहन तेरा मुस्कुराना,
भूल जाने के काबिल नहीं है,
जब से सांवरे ने पकड़ा मेरा हाथ
हो गई मेरी बल्ले बल्ले
मायरे की चुनरी कमाल,बीरो जी आया आंगनिए।
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