चित्त के चोर कान्हा हाए माखन चोर कान्हा
हरिओम की धुन पर है राजी, शिव शंकर भोले कैलाशी।
खयालों में तेरी झलक पा गया हूं।झलक पा गया हूं।
मरघट बीच बसे एक नारी रे
तु चल तो सही खाटू जीवन महकाएगा।
खाले खाले रे कन्हैया लाई माखन मिश्री घोल।
जहां राधा नाम रसधार बहे वहीं रास बिहारी रहते हैं।
श्री राधे गोपाल भजमन श्री राधे
लेकर वासुदेव कृष्ण को, चल दिए रात अंधेरी में।
ओ खाटू वाले श्याम धनि सब तेरे हवाले है।
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