गणपति मेरी कुटिया में,आके भाग्य जगाना है
मेरे घर में है देवा पधारे, देखो जागे भाग्य हमारे।
कैसे मिलन हो तेरा मोहन जरा बता दे,
आ जाओ गजानन कीर्तन में अब रात गुजरने वाली है ।
जाग नर ए जाग दिवाना,
अब तो मूर्ख जाग रे,
मोरी अरज सुनो गणराजा, है देवों के महाराजा।
गणपति मेरी कुटिया में,आके भाग्य जगाना है।
मरुधर में ज्योत जगाय गयो, बाबो धोली ध्वजा फहराय गयो
बजते ढप्प ढोल नगाड़े जन्मदिन राधा रानी का।
म्हारे लारे बंशीवालो लाग्यो ये मांय ईण सरवरिये पाणी कदे ना भरबा जाऊँ।
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