अपना तो सब कुछ कन्हैया एक तु संसार में।
पायोजी मैंने कृष्णा रतन धन पायो।
रुनक झुनक चली आना ,
मैया मेरे अंगना मे।
अब तो दरस दिखा दे मैं तेरा हो चुका हूं।
दो बूंद का खजाना खाटू में लेके जाना।खाटू में लेके जाना।
तेरे दर को ही घर माना,मैने अपना सांवरिया।
चमन की सैर का था नाम फूलो का बहाना था
गंगा बह रही हर की पौड़ी डुबकी ले ले लांगुरिया।
मूरत वाले भैया मां की मूरत बनादे
जी चाहे जो भी मांगल्यो,ये जग की मात है,
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