राघव ललन तेरे कोमल चरण,कहि कांकरिया गडी नहीं जाय
कृष्ण कन्हैया बंसी बजैया,नंदलाला घनश्याम रे
रे मन ये दो दिन का मेला रहेगा,
रामा रामा रटते रटते बीती रे उमरिया
दुनिया से था मैं हारा, इसने दिया सहारा।
श्री राम की कृपा से, सब काम हो रहा है
मेरे राम की प्राण प्रतिष्ठा है,
जब से लगाई घर में बाबा तेरी तस्वीर
जरा चल के वृंदावन देखो, श्याम बंसी बजाते मिलेंगे
आयोडा रे तिलक लगाए, सांवरिया म्हारी हाजरी लीख जो।
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