खुला रहेगा युगो युगो तक ये इनका दरबार,
अधराने खोलो कुछ फरमाओ जी,
कोई तो हुकम सुनाओ जी बाबा,
तेरी मेरी कहा जोड़ी, कन्हैया तू कारो मैं गोरी।
कोई जाये जो वृन्दावन, मेरा पैगाम ले जाना,
जिनके हृदय में है सिया राम,
उनके निकट बसे श्री हनुमान,
अरे नर लेख तो लिख्योडा पावे रे कागज मंढ गयो कर्मा को।
सास तेरी एक ना मानूंगी, फिलम चंद्रावल देखूंगी।
जय राधा रसिक बिहारी, श्री राधा रसिक बिहारी।
तेरी सूरत है प्यारी प्यारी,
खाता खोल के देख सांवरा,
चाकर बहुत पुराणो हूँ,
राम न भज्या सु रामजी रिझेला,
आ दुनिया रिझेली मीठी बता सूं,
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