माँ बिन कोण लड़ावे लाड
कोण मने छाती ते लावे
आ मन बैठ जरा श्री रामजी के चरणों में,
तेरा कैसे कर्ज चुकाऊ कितने एहसान गिनाऊ,
कीर्तन की है सब बाबा तैयारी
लेते हैं जोत तब आओ मुरारी।
क्या की है नाराज़ी कुछ बोलो तो सही
रसिया लागे साँवरिया देखो फागण में
रसिया लागे रे.
श्याम आओ ना मनडे री बात कर ल्यां।
म्हारे हिवडे उठी हिलोर भायला खाटू नगरी जावण की,
कन्हैया तेरी जीभ चटोरी रे,श्याम तेरी जीभ चटोरी रे
आँख फड़ूखे, बोले कागलियो,
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