नस नस में भरी पीर सखी मेरो कैसे बखत कटेगो।
लक्ष्मण के लागो वाण, ओ वाण, हनुमान संजीवन ले आयियों।
जल केडी तम्बुडी,
पवन केडी झारी रे,
हो गया लीलोडे असवार,
बाबा रामदेव धणीया रे,
हाँ जी रे दिवाना थारी उमर,
बीती जावे रे दिवाना,
नाम जप ले हरि का नाम जप ले, उम्र तेरी कट जाएगी नाम जप ले
एक मंदिर में पांच सहेली आपस में बतलावे।
अब ना छिपाऊंगी सबको बताऊंगी
ग्वालों का है सरदार मेरा कृष्ण कनाहिया
जब से सती ने छोड़ा शिव का ठिकाना।
भूल गए भोले बाबा डमरू बजाना।
चलो जी चलो खाटू इक बार,
हो जायेगा तुम को भी सँवारे से प्यार,
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