ये रे मनवा दो दिन की जिंदगानी थारी मत कर मान गुमान, थोड़ा रट ले हरि को नाम।
लाल समझाए ले मैया, है नटखट तेरो कन्हैया।
हम तेरे शहर में आए हैं मुसाफिर की तरह,
क्या माँगू जी मैं क्या मांगू,
श्याम प्रभु तुमसे क्या मांगू।।
भूल से भी ना भुलाना, श्याम वादा कीजिए
आई हूँ खाटू, मैं पहली बार,
चर्चे सुने हैं, इनके हज़ार,
जो किसी से ना कह पाओ,
वो श्याम से बतलाना,
खाटू वाले श्याम बाबा तुझे ही तो पाना है,
श्याम थारी चौखट पे,
आया हूँ मैं हार के,
दर दर भटका हूँ मैं,
कितना तनहा हूँ मैं,
कहाँ हो सांवरिया,
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