मेरा शंकर त्रिपुरारी सारे जग से निराला है,
गम का अँधेरा ये,
जल्दी ढल जाएगा,
ये तो प्रेम के आंसू हैं मोहन,
हर जगह पर ये गिरते नहीं है,
तेरी शरण हम आ गए,
बाबा कृपा करो,
तारे गिन गिन के है उधो रात कटे है मेरी
मोहन बाबा तुम से बोलूं एक बात में।
मोर मुकुट बंसी जिसकी पहचान है।
अब ना रुकेगा भगवा, अब ना झुकेगा भगवा।
नीले घोड़े वाले ओ कलयुग के अवतारी,
जटाधारी बनके त्रिपुरारी बनके चले आना,
भोले चले आना, चले आना…
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