मेरे सिर पे बाबा श्याम घुमा दे मोर छड़ी।
दो नावों की सवारी करना अब तू छोड़ दे
तेरे बिना ओ श्याम मेरा क्या हाल हो गया,
बाबा मैं हार गया हूँ मुझको जिताने आजा
ऐसा सज धज बैठा मेरा साँवरा, नैनों से इशारे कोई करता,
भक्तों के हर दर्द को अपना समझे सांवरा
श्याम रखते थे खबर तुम बेखबर क्यों हो गए
यह काई लखन सीख्यो रे कानुडा माखन चोर खाबा का।
दरबार में सरकार के,
नाचेंगे हम छम छम,
मन में बाजी शहनाई, के फागण आया है,
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