शिव शंकर भोले कैलाशी,
तेरे दरश को अखियां है प्यासी,
दरबार तेरा ओ श्याम,खुशियों का खजाना है
फागण आया प्रेमियों चलो खाटू दरबार,
ये सोच कर के, दिल मेरा रोता,
अगर तू ना होता, तो मेरा क्या होता,
मेरी डगमग नैया डोले बाबा क्यों कुछ ना बोले,
जब जब भी बाबा तुमसे नैनो से नैन मिलाये नैना मेरे भर आये,
वो सबसे सुखी इंसान जग में ना कोई धनवान,उसके समान रे
ईश्वर जैसा देवा नाही, प्रेम जैसी सेवा नाहीं,
बालाजी तेरा देऊ लंगोटा लाल, ज्योत पर संकट काटे रे।
रंग रंगीलो छैल छबीलो सांवरियो है म्हारो
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