फागणिये का रंग चढ़ा फिर मस्ती बरसेगी वहां
जहाँ है सांवरा।
मंदिर अब सजने लगा है फागुन अब लगने लगा है
फागण का नजारा है, आई है खाटू से चिट्ठी आज, श्याम बाबा ने पुकारा है।
फागुन में खाटू के दर का,
गजब नजारा लागे से,
महीनो फागण को रंगीलो बाबो श्याम बुलावे रे,महीनो फागण को।
दूल्हा बने भोले नाथ जी हमारे,
चली बारात गोरा जी के द्वारे,
शंकर दयालु दूसरा,
तुमसा कोई नहीं,
गौरां को व्याहने, आए गयिओ रे,
मेरा भोला भंडारी,
हाथ जोड़कर मांग प्रभु से भोले जैसा देव मिले।
भोला मेरा मस्त मलंगा, भोला मेरा मस्त मलंगा।
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