तेरी लाल छड़ी बाबा करती है खेल न्यारे,
धारो मन मूरत कृष्ण काले की,
गोवर्धनधारी मुरली वाले की…
मुरली वाले कृष्ण काले खोली वाले श्याम।
ढूंढत ढूंढत खाटू नगरी आ गयी,
फागण का महीना आ गया चालो रे खाटू चालो
सूती काई रंग रा महल में,
गौरी फागण आयो ये.
फागुन का आया मेला दिलदार साँवरे,
आयो नंदगांव से होली खेलन नटवर नंद किशोर।
फागुन आयो रंग रंगीलो,
खाटू पैदल जाना है,
रंग रंगीलो मेलो आयो मन हर सायो है।
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