होलिया में उड़े रे गुलाल,
श्याम तेरे मंदिर में,
हारे हम तो हारे,
तुम बनो ना सहारे,
हम पे दया करो,
चिठिया ले जा ऊधो,
जा के कहियो कन्हैया से,
बिरहा सहा नही जाए।।
खाटू नगरी में उड़ रहा रंग आई होली आई रे।
बाबा कीर्तन में आओ,
भक्ता से हस बतलाओ,
मनड़ो म्हारो घबरावे,
धीरज भी छुट्यो जावे,
कोई तने कहता राम पुजारी,
कोई कहे शिवशंकर अवतारी,
रुखो सुखो भावै नहीं भावै थाने माल
वृंदावन मच रही धूम होली खेलन में।
ओ कान्हा मोपे रंग ना डालो,
माखन चाहे सारा खा लो,
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