गौरा ढुढ रही पर्वत पर,शिव को पति बनाने को।
ओ माँ जागो जागो शेरावाली
जागो मेहरा वाली
सवेरा हो गया है
मन के भोले पंछी को निस दिन यह पाठ पढ़ाया कर
चोटी के ऊपर चोटी, चोटी पर गुफा है छोटी।
नैनन में पिचकारी दई
मोय गारी दई
होरी खेली न जाय
सोच समझकर साँवरिया,
तू मंदिर खोलना,
नैन तेरे मोटे मोटे, नैन से बाते करता,
नैन तेरे मोटे मोटे लगे कैसे कजरारे बाल घुंगराले
राधा सुनी सुनी लागे,
मारा श्याम बिना।
श्यामा होली खेलन आईयाँ तेरियाँ सालियाँ ने,
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