हे शिवशंकर नाथ हमारे,
हम सबके एक तुम्ही सहारे,
Author: Pushpanjali
बरसाने में अपना,
जीवन बितायेंगे,
मेरी लग गई बैरन आंख आंख मैया पर्वत से चाल पड़ी,
रामा कह वन वन में मेरी सीता कहां गई है
पकड़ लो हाथ भोलेनाथ नहीं तो डूब जाएंगे,
कृपा की ना होती जो आदत तुम्हारी,
तो सुनी ही रहती अदालत तुम्हारी,
कलयुग में बाबा श्याम का जादू,
भक्तो के सर चढ़ जाएगा,
ओ बाबा थाने कांई कांई भावे,
बोलो कांई भोग लगावा,
रात को श्याम सपनों में आया कैसे कह दूं कि आया नहीं है,
जीने का रास्ता ये एक वंशी सिखाती है,
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