जंभेश्वर बीरा रोटु में आवजो जी, बाई उमा जोवे बाटडली थारी ।।
Author: Pushpanjali
जपो रे मन श्याम की माला
बने तेरा रखवाला।
ऊंचे पर्वत शंकर बसे मै शंकर दे संग,
रे मईया शेर सजाके री, एक बार आजा दंगल में,
प्रभु चरणों में अर्पण ना हो वो जीवन किस काम का,
म्हारो त्रिलोकी रो नाथ, परनबा चाल्यो गोरा ने।
अंजनी के लाला तेरे खेल है निराले।
मेरे सोणे हारा वालिया अस्सा तेरे बिन ना रैहन्दे…
पूजूं मैं प्रथम तुमको,
पूजा मेरी स्वीकार करो,
आते जाते हुए गुनगुनाया करो,
राम बोला करो राम गाया करो….
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