कान्हा तेरे रोज उल्हाने आवे रेे मन मोहन मुरली वाले,
Author: Pushpanjali
आयु तेरी बीत रही है कुछ तो सोच विचार,
जन्म ये मिले ना बारम्बार….
हे केवट तुम उतराई लो,
तूने गंगा पार उतारा है,
राम नाम निश दिन जपले रे,
राम नाम ही सार है,
आनंद के दाता हैं गजानन,
आनंद के दाता,
भव-दुख-भंजन परम सहायक,
राम-नाम हरदम सुख-दायक.
शिव भोला भंडारी नज़र तेरी मुझ पर हो जाये,
सारी दुनिया दा छड्ड के ख्याल आ गए,
शेरावालिये द्वारे लाल आ गए…..
नैन तेरे मोटे मोटे लगे कैसे कजरारे
तुम हो कारे कारे मैं गोरी संवारे
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