बम बाज रही भोले की,चारों दिशाएं,
ब म बाज रही।
Author: Pushpanjali
मस्त महीना सावन का यह आया है,
भावों का तेरे, जो दिल में अभाव, कैसे हो तेरा प्रभु से लगाव,
भोले शंकर मैं तुम्हारा, लगता नहीं कोई,
सजे हैं दूल्हे से बने हैं दूल्हे से
पगड़ी सजाये सर पे श्याम सजे हैं दूल्हे से
मुकद्दर के मालिक, मुकद्दर बना दे, सोया नसीबा मेरा, फिर से जगा दे ।।
जो मुसीबत का मारा श्याम ने सभी को तारा।
ढोलक झाँझ मजीरा डफली ले
नचावन आया जी नचावन आया,
राधे झूलन पधारो झुकी आए बदरा,
श्री श्याम धनि के भगत हुए श्याम ने जिन्हे वरदान दिया,
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