जीवन में अपने किनारे ना होते, अगर तेरे दर पर आकर हारे ना होते।
Author: Pushpanjali
तेरे दर पे मैं आया प्रभु, दुनिया से ठुकराया प्रभु
चलो नंद यशोदा के द्वारी,
ब्रज में प्रगते हैं सारे जग के पालनहारी,
मैंने ढूंढ लिए चारों धाम,
नहीं मिले राम,
यही तो दुःख भरी ह।
मेरी नैया पार लगा दे हो हे हनुमान गदाधारी।
हैं जो सरकार खाटू के, वो हारे को जिताते हैं
आजु सखि, राखी को त्यौहार
अंजनी के लाल हनुमान आज मेरा संकट हरो
कौन गली गए श्याम,
बता दे सखी कौन गली गए श्याम।
गुरुसा कद तो आवोला, म्हारे देश में,
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