द्वार पे बैठा राह निहारु, थक गए मेरे नैना
Author: Pushpanjali
गोरा थारी जाँन तो चडीँ काँकड मे,
रँगीलो जोगी आयो परणबा ने…..
फकीरी, लागा नहीं शब्दों रा तीर ।।
अरे कोणी भूलूला गुण थारो ओ गुरासा मारो अबकोड़ों जन्म सुधारो।
सुन ओ कृष्ण की मां बहुत दिल काला है
है चाँद से ज्यादा सोना, मेरा श्याम सलोना,
अरे ओ अंजनी लाला वीर बजरंगी बाला
तेरी रहमतो ने हमको,
दर पर बुला लिया है,
शिव जी रो मनड़ो मोयो रे ,
भीलनी रंगीली।
तू तो चिंमटो बजा रे भोलानाथ छमा छम नाचूंगी।
You must be logged in to post a comment.