संदेश पढ़ कर रोई रे, मनमोहन तेरी याद में।
Author: Pushpanjali
जय गणेश गणनाथ दयानिधि,
सकल विघन कर दूर हमारे,
खाटू में है मंदिर तेरा जग पे राज तुम्हारा है
सरस्वती नमस्तुभ्यं,
बड़ा सुन्दर सजा है दरबार,
आजा होके लीले पे असवार ।।
ले लो शरण कन्हैया दुनिया से हम है हारे
कोई देखे या ना देखे,
बाबा देख रहा है,
इंसाफ का दर है तेरा, यही सोच के आता हूँ
मेरे दिल को चुराया कन्हियां ने,
लाल चोला जय जय मां लागी हैं किनारियां
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