अमृत की वर्षा हो रही मेरे गोविंद के दरबार में।
Author: Pushpanjali
जब भी चढ़ेगा श्याम का रंग, बदल जाएगा जीने का ढंग।
तेरा नाम जपु तेरा ध्यान धरू। बाबा सुबह शाम तेरी पूजा करू।
कठ्ठे रे लगाई अतरी देर रे सांवरिया म्हारा
काशी में शिव जोगिया बिराजे हो।
जगत के रंग क्या देखूं मेरे महाकाल काफी है।
अरे मारा मनड़ा बदल गया दिनडा,
वा पेला जेडी बात नही
काले काले बदरा,घिर घिर आ रहे है,
औरों से हंस हंस बोले हमारा सैयां हमसे ना बोले।
चोपनिया रे पाना में,
भगवान लेखो लेसी राम।
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