तकदीर मुझे ले चल,महाकाल की बस्ती में,
Author: Pushpanjali
भरोसा काई है नंदलाला को, छाने छाने माखन खागयो मोटा गाला को
बिन योग साधना के बंदे मुक्ति का रास्ता मिलता ना
है तुमको हमारी फिक्र सांवरे।
आया हरियाली तीज का त्यौहार महीना सावन का।
ले के आयो रे तीज त्यौहार, महीना सावन का
आज भोले बाबा मिलेंगे सत्संग में।
सेवा का म्हाने मौका दे दे, सेवा करनो चाहूं सूं
उसे वक्त भला क्या मारे,
जिसको औलाद ने मारा।
संतो अमरलोक कुण जासी
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