कोई नहीं अपना, समझ मना,
Author: Pushpanjali
यह मेरी लड़नी जिठानी लड़ने में होशियार है।
डम डम डम डम डमरू बाजे बाजे बीन तंबूरा रे
गाया कर गाया कर ओम नाम गाया कर।
सावन में श्याम बिहारी, झूलेंगे कृष्ण मुरारी।
भोले के नाम का प्याला पिएंगे
थारा रंग महल में ,अजब शहर में ,आजा रे हंसा भाई, निर्गुण राजा पे, सिरगुण सेज बिछाई
करना होये सो करले रे साधो,
मनक जनम दुहेलो है,
हे राम रस मीठो घणो रे, जोगिया जी
मन मस्त हुआ फिर क्या बोले,
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